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शनिवार, 18 नवंबर 2017

भारत प्रधानमंत्री प्रधान देश है ।

  – इन तीन लोगों को मिला कर कुल प्रधानमंत्रियों की संख्या 24 हो गई है । सब को साल में 15-15 दिन के  लिए प्रधानमंत्री बना देना चाहिए । देश में स्थिरता रहेगी ।

मित्रों, भारत एक विचित्र देश है । भारत नदियों का देश है । भारत पहाड़ों का देश है । भारत ऋतुओं का देश है । भारत बाढ प्रधान देश है । भारत सूखा प्रधान देश भी है । भारत संस्कृति प्रधान देश है । भारत रंगों का देश है । भारत विभिन्न धर्मों का देश है । भारत संतों का देश है, तो लगे हाथ तमाम गुरूओं और शिष्यों का भी देश है । भारत क्रिकेट प्रधान देश है । भारत भ्रष्टाचार प्रधान देश है । भारत नकलचियों का देश है । भारत बेरोजगारों का देश है । भारत में स्त्रियों की पूजा होती है । भारत बलात्कार प्रधान देश है । भारत भेड़ियाधसान देश है, इसलिए भारत लाठीचार्जों का देश है । भारत स्विस बैंक के खाता धारकों का देश है । भारत नेताओं का देश है । भारत दलालों का देश है । भारत अफसरशाहों का देश है । भारत माफियाओं का देश है । भारत देशभक्तों का देश है । भारत गद्दारों का देश है । भारत फर्जी न्यूज़ चैनलों का देश है । भारत गरीबों का देश है मगर साथ ही भारत अंबानियों और मित्तलों का भी देश है । भारत कृषी प्रधान देश है । भारत आत्महत्यारत कृषकों का देश है । भारत चुनाव प्रधान देश है और अब भारत प्रधानमंत्री प्रधान देश भी है ।

 

जी हाँ मित्रों, अब भारत प्रधानमंत्री प्रधान देश भी है । हालाँकि हम प्रधानमंत्री के मामले में बहुत पहेल ही आत्मनिर्भर हो गये थे, पर धीरे-धीरे स्थिति मजबूत होती गई और हमारे यहाँ प्रधानमंत्रियों का उत्पादन लगातार बढता गया जिससे अब हमारे पास इफरात में प्रधानमंत्री हो गये हैं । आज हम लगभग हर प्रदेश में प्रधानमंत्रियों का उत्पादन कर रहे हैं । राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर को छोड़िये अब हम जिला स्तर पर भी प्रधानमंत्री पैदा कर रहे हैं । आज समूचा विश्व हमारे प्रधानमंत्री के उत्पादन स्तर को देख कर चकित है और हमारा मुँह ताक रहा है । प्रधानमंत्री भारत में सरप्लस हो गये हैं, फिर भी हम कितने स्वार्थी हैं कि हम भारतीय प्रधानमंत्रियों को बाहर एक्सपोर्ट नहीं कर रहे हैं । बॉर्न सेल्फिश ! दुनिया के तमाम देश हैं जो कि एक अदद प्रधानमंत्री के लिए तरस रहे हैं और हम अपने क्षुद्र स्वार्थ के लिए प्रधानमंत्रियों की कालाबाज़ारी कर रहे हैं और स्टॉक पर स्टॉक बढाये जा रहे हैं । बोस्नीया, सोमालिया, केन्या, तंजानिया जैसे दो दर्जन देश हमारा मुँह ताक रहे हैं कि हमें भले ही गेंहू मत दो पर एक अदद प्रधानमंत्री तो दे दो । क्या करोगे कंबख्तों डेढ दर्जन प्रधानमंत्री रख कर ? तुम्हारे लोकतंत्र की तो रेड़ मर ही चुकी है, कुछ हमारे लोकतंत्र की भी फिक्र करो । अरे सालों, कुछ की तो एक्सपायरी डेट भी करीब है । आखिर कब भेजोगे ? कम से कम एक अटल बिहारी ही भेज दो ।   हमव्हीलचेयर पर बिठा कर ही काम चला लेगें ।

 

सोनिया जी पिछली बार प्रधानमंत्री बनते बनते रह गई थीं, मगर फिर उन्होंने सुपर प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाल ली । वर्तमान प्रधानमंत्री डा0 मनमोहन सिंह को भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली पर संदेह नहीं है, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि कमीने वोटर उन्हें लोकसभा की एक मामूली सी सीट भी नसीब न होने देंगे । इसलिए राज्य सभा का पिछला दरवाजा उन्हें अधिक रास आता है । राहुल गाँधी को तो एक न एक दिन इस कुटिच्चर देश की बागडोर संभालनी ही है, लेकिन इस बार ही इतने ढेर सारे प्रधानमंत्री लाइन में लगे हैं इस लिए लगता नहीं की छोरे का नम्बर अबकी आ पायेगा । इसी चक्कर में ही बेचारे की शादी अटकी हुई है । बाप इटैलियन ले आया, इनको ब्राजीलियन पसंद है ।

 

श्रीमान चाराभकोसू लालू यादव रेल मिनिस्टरी करते करते थक गये हैं इसलिए रिलेक्स होने के लिए प्राइममिनिस्टर की कुर्सी के सपने देख रहे हैं । मुलायम सिंह को यू0पी0 की चीफमिनिस्टरी से मायावती ने बेदखल कर दिया, दो साल से वो फालतू बैठे हैं, फालतू आदमियों के टाईम पास के लिए ही भारत के प्रधानमंत्री की कुर्सी बनी है, वो उसी से काम चला लेगें, बाकी दलाली और माफियागीरी के लिए अमर सिंह और शिवपाल तो जिंदा हैं ही, अमिताभ बच्चन और जया बच्चन भी हथा बंटा सकते हैं । कारोबारियों की जय हो ।

 

मायावती अपनी सोशल इंजीनियरिंग का कमाल अब राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाना चाहती हैं । उनका एक ही उसूल है : न खाऊंगी, न खाने दूंगी । खाऊंगी तो सब खाऊंगी और मुलायम सिंह के मुँह का निवाला छीन कर खाऊंगी । इनका हाथी यू.पी. में तो चिघांड़ सकता है पर राष्ट्रीय स्तर पर लीद ही लीपेगा ।

 

अगर शुभचिंतकों ने हाथ लगा दिया तो 3 सीटों वाली लोजपा के सर्वेसर्वा श्री रामविलास पासवान भी लोक लाज त्याग कर यह कांटो का ताज अपने सिर पर रखने को तैयार मिलेंगे ।

 

लाल कृष्ण अडवाणी, रथ पर चलने वाले महारथी । पूर्व गृहमंत्री, उर्फ लोह पुरूष । अब इस उम्र में भी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठे तो अगले लोकसभा चुनाव तक तो इनका स्वास्थ्य भी अटल बिहारी बाजपेई हो जायेगा, फिर नरेन्द्र मोदी को तो 40 प्रतिशत देश अपना भावी प्रधानमंत्री मान ही रहा है ।

 

मराठा छत्रप शरद पवार, हमारे पूज्यनीय कृषी मंत्री । इनके चलते भारत कृषी निर्यातक से कृषी आयातक देश हो गया । धन्य हो । पहले तो बुध्दि बी.सी.सी.आई. के अध्यक्ष पद पर लगी हुई थी अब आई.सी.सी. के अध्यक्ष पद पर लगी हुई है । प्रधानमंत्री के पार्ट टाइम काम के लिए तो समय निकाल ही लेगें । इन की एक मात्र उपलब्धि दीवालिया घोषित मराठी महिला को राष्ट्रपति बनवाना है ।

 

अजित सिंह भी प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं । बाप की तरह भले ही दो दिन के लिए प्रधानमंत्री की कुर्सी नसीब हो जाये । नाम हो जाये कि हम भी पूर्व प्रधानमंत्री हैं । फिर तीसरे मोर्चे के संयोजक पता नहीं कौन से देवगौड़ा हैं । कर्नाटक में लोगों ने बाप-बेटे दोनों को बेरोजगार कर दिया, खाली बैठे हैं । सोचा लगे हाथ चलो हम भी एक एप्लीकेशन प्रधानमंत्री पद के लिए डाल दें ।

 

चीन के खाद-पानी से चलने वाली कम्युनिस्ट पार्टी से भी कोई न कोई जला भुना कामरेडी भी प्रधानमंत्री बनने को तैयार बैठा होगा। पर अबकि बंगाल और केरल दोनों जगह कम्युनिस्टों की हालत पतली है । देश का सौभाग्य है । सुभाष चंद्र बोस को कुत्ता कहने वाले और सन 1962 में चीनी आक्रमण को नेहरू द्वारा फैलाई गई अफवाह कहने वाले मीरजाफरों को कम ही सीटें मिलें तभी अच्छा है ।

 

तो देखा मित्रों आपने, इत्ते सारे प्रधानमंत्री । जेइ लिए तो कहता हँ कि भारत प्रधानमंत्री प्रधान देश है ।

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