काम ऐसे करो कि लोग आपको….

किसी दूसरे काम के लिए बोले ही नहीं….

रविवार, 19 नवंबर 2017

सुषमा रानी झिंझोटिया का जवाबी प्रेमपत्र


श्री जोखू सिंह जी उपध्याय,
जुग जुग जियें आप, आप ने पिछले पत्र में मुझे पालागी कहा था इसलिये मेरा फर्ज बनता है कि आप को आशीर्वाद दूँ । मुझ को हार्दिक कष्ट है कि टामी (हरामी) ने आपकी तीन पैन्टों का सत्यानाश कर दिया । जब से मुझे टामी की इस कुत्तई का पता चला है मैंने उसे पुचकारना बंद कर दिया है और अब मैं उसे गोद में भी नहीं उठाती हँ । इस टामी ने तो मेरा जीना हराम कर रखा है । तुम से पहले वह मेरे चार और प्रेमियों को काट चुका है । तुम तो खुशनसीब थे । पिछले चार तो इंजेक्शन लगवा रहे हैं ।

जोखू जी, आपने मुझे पहली बार मेरे पिताजी की दुकान पर समोसा बांटते हुये देखा था । उस दिन मेरे खिलखिलाने और बेवजह मुस्कुराने की वजह वही थी जिसके लिये आपने झुंझलाते हुये सर ऊपर उठाया था । असल में आलू हम बोरे का बोरा खरीदते हैं । उस दिन आलू नीचे की थी । उन आलूओं में सड़न पैदा हो गई थी । नमक तो पिताजी भूल ही गये थे और उस दिन धनिया भी मंहगा गई थी । इस लिये मिर्चा जरा ज्यादा डालना पड़ गया था । जब इतना झाम हो तो ग्राहक गरियायेगा है ही । इस लिये जिस दिन समोसों में कोई गड़बड़ होती है मैं ही समोसे बांटती हँ । मेरी मुस्कान मीठी चटनी का काम करती है और सड़े हुये बासी आलू को भी ग्राहक आरम से हजम कर जाता है । हालांकि मेरे लिये तो सभी ग्राहक एक समान है पर उस दिन आप पर नजर पड़ी तो मुझे लगा कि इस आलू में कुछ दम है । फिर आपने मेरे घर के चक्कर मारने शुरू कर दिये । पहले तो मुझे लगा कि कोई शायद समोसों का आर्डर देने आया है, पर जब टामी ने भी आपको पहचानना शुरू कर दिया तब मैंने जाना कि आप मेरे चक्कर में गली के चक्कर लगा रहे हैं । टामी ने जब भी आपको दौड़या मैं खिड़की से देखती रहती और भगवान से मनाती कि आपका बाल भी बांका न हो । आपने भी हार नहीं मानी और इस कमीने टामी से आपने भी खूब लोहा लिया । मैंने यह कसम खायी थी कि जो लड़का टामी के जबड़ों से बच जायेगा वही मुझसे दोस्ती करने के लायक होगा । टामी से लगातार पंगा ले कर आपने मेरे हृदय को जीत लिया है ।

जोखू जी आप को नहीं मालूम कि आप मेरे मन मंदिर में बहुत पहले से ही बसे हुये हैं । मैं और आप एक ही डिग्री कालेज में पढ़ते हैं । मुझको दुकान की वजह से और आपको अन्य व्यक्तिगत कार्यों की वजह से कालेज जाने का वक्त नहीं मिलता अन्यथा हमारी मुलाकात पहले ही हो चुकी होती । पिछले साल एनुअल फक्शंन पर जो आपने काव्य पाठ किया था ‘फागुन में आजा बलमवा’ वह मेरे हृदय में उतर गया था । आप का तभी से मुझको इंतजार है । ये बंशी वाले की कित्ती बड़ी किरपा है कि उसने आपको एक दिन आखिर मेरे बाप की दुकान तक पहुंचा ही दिया । किसी ने सच्ची कहा है कि प्रर्थना में बड़ी ताकत होती है।

आगे समाचार यह है कि बापू और भईया मेरी सादी सेठ चमन लाल के बेवड़े लड़के रेवड़ी लाल से करवाना चाहते हैं । जोखू जी अब आपको ही कुछ करना पड़ेगा । वरना वह रेवड़ी लाल एक दिन मुझको आपसे छीन कर ले जायेगा । इधर दो हफ्तों से उसके फोन भी खूब आने लगे हैं । मुझसे पूछ रहा था कि ”इन्ही लोगों ने ले लिया दुप्पटा मेरा, वाला गाना आता है ? नहीं आता हो तो सीख लो ।” सुना है वह रेवड़ी दारू पीने के बाद गाना सुनने का भी शौकीन है । मेरी तो जिंदगी उसको गिलास पकड़ाते और उमराव जान का गाना सुनाते बीतेगी । उस नर्क से बचने का बस एक ही रास्ता है और वह है हम दानों इस बेरहम दुनिया से कहीं दूर भाग चलें । जहाँ न कोई बाप हो, न कोई भाई, न कोई टामी हो और न कोई रेवड़ी लाल हो । रूपयों पैसों की चिंता तुम मत करना । मैं माँ के जेवर और पिता जी की तिजोरी साफ करके आऊंगी । हम यहाँ से भुसावल चले चलेंगे । वहाँ मेरी एक सहेली रहती है । मेरे पिताजी के पैसों से हम एक मिठाई की दुकान खोल लेंगे । बेसन के लड्डू और समोसे बनाना मैं जानती ही हूँ । तुम भी चाय बनाना जानते होगे । हमारी दुकान चल निकलेगी क्योंकि समोसे बेचने की कला तो मैं जानती ही हूँ । फिर तीन चार साल में हमारी मदद करने के लिये तीन चार बच्चे भी होंगे ।

अच्छा पत्र अब खत्म करती हँ । अगर हमारा प्यार सच्चा है तो अगली 3 तारीख को हम इटारसी-भूसावल पेसैंजर में बैठे होंगे । डरने की कोई जरूरत नहीं है । मुझे तीन बार घर से भागने का एक्सपीरियेन्स है । अब की दफा फुल प्रूफ प्लान बनाया है । अगर सब कुछ सही रहा तो हमें कोई पकड़ नहीं पायेगा । खर्चे की फिकर मत करना । मैं सबसंभाल लूंगी ।

तुम्हारे लिये हर खतरा उठाने को तैयार
तुम्हारी भावी संगिनी
सुषमा रानी झिंझोटिया 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कल की बात पुरानी : भाग -1

पृथ्वी पर तीन रत्न हैं – जल, अन्न और सुभाषित । लेकिन मूर्ख लोग पत्थर के टुकडों को ही रत्न कहते रहते हैं । – संस्कृत सुभाषित   ब...