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किसी दूसरे काम के लिए बोले ही नहीं….

शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

कण्डोम पैनल

यूपी बोर्ड के इस साल के रिजल्ट निकल गये हैं । विद्यार्थियों ने आराम से कड़ी मेहनत करके सीबीएसइ और आईसीएससी बोर्ड के विद्यार्थियों के बराबर नंबर पाये। हमारे एक मित्र जो कि सरकारी शिक्षक हैं और उन्हें पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी परीक्षार्थियों की कॉपियॉं जाचंने का महती कार्य करना पड़ा । हमारे उत्तम प्रदेश के नौनिहालों ने जो दर्दनाक उत्तर दिये हैं, उसके बारे में उनसे जानने को मिला । बकौल श्री पाण्डेय जी:-

कॉपियों का एक बंडल खोलने पर अध्यापक ने ने मूल्यांकन इंचार्ज से कहा, ‘सर इसमें लिखा है कि 530 कॉपियॉं भेजी जा रही हैं, लेकिन इसमें तो सिर्फ 520 कॉपियॉं ही हैं ?

इंचार्ज मुस्कुराये, ‘आप 520 जांचिये । बाकी 10 कॉपियॉं लिखी जा रही होंगी, वे बाद में आ जायेंगी तो उन्हें भी जांच दीजियेगा । आपको पारिश्रमिक सभी कॉपियों का मिलेगा ।’

अध्यापक ने सिर खुजाया, ‘लेकिन सर पत्रक में एक परीक्षार्थी गैरहाजिर है पर उसकी कॉपी फिर भी रखी हुयी है ।’

इंचार्ज बोला, ‘वह परीक्षार्थी कक्षा में गैरहाजिर होगा पर केन्द्रव्यवस्थापक के घर हाजिर होगा । आप उसकी कॉपी जांच दीजिये । क्यों अपने पारिश्रमिक का नुकसान करते हैं ।’

अध्यापक बौखला गया, ‘एक ही परीक्षार्थी के रोल नंबर पर दो कॉपियॉं रखी हैं । क्या दोनो जांच दूं ?

इंचार्ज हंस कर बोले, ‘जी नहीं दोनों में से जिस कॉपी का उत्तर अधिक सटीक हो वह जांच दीजिये । सरकार छात्रों की हित चितंक है । किसी परीक्षार्थी का नुकसान नहीं होना चाहिये ।

तब तक फिजिक्स की कॉपी जांचने वाला एक अध्यापक कॉपियों का बंडल लेकर इंचार्ज के पास पहुंचा । उसने आश्चर्य से इंजार्च से पूछा, ‘सर, इन सभी कॉपियों में लड़कों ने कण्डोम पैनल लिखा है, ये कौन सी बला है ।’

इंचार्ज छूटते ही बोला, ‘कण्डोम पैनल को कंट्रोल पैनल पढिये । नकल कराने वाले अध्यापक को कण्डोम और कंट्रोल का फर्क नहीं मालूम था । लड़के भी कंडोम समझते हैं । वे कंट्रोल से मतलब नहीं रखना चाहते ।

=> जिस के भी पास नकल सामग्री है हमें दे दीजिये. बैच आने वाला है. बैच आने के बाद हमारी कोइ जिम्मेदारी नहीं होगी.animated-teacher-image-0025animated-teacher-image-0131


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