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शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

रंग बंधा रहै, घर चुअत रहै

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पांच राज्यों में हुये चुनावों का परिणाम आते ही देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी के कार्यकर्ताओं को सांप सूंघ गया । चुनावी जंग में उन्हें ऐसी शिकस्त मिली की कि वे जनता के बीच सिर उठाकर चलने के काबिल भी नहीं रह गये थे ।

छोटे से केन्द्रशासित प्रदेश पुदूचेरी में सत्ता आने की खुशी में भंगड़ा नाच रहे युवा कार्यकर्ताओं को वयोवृद्ध कांग्रेसी ने फटकार लगायी, ‘शर्म, हया भी कोयी चीज होती है । चुनाव में हमारा सूपड़ा साफ हो गया और हम नाच रहे हैं । एक जमाना था, जब नेहरू, शास्त्री, मंगला प्रसाद और बहुगुणा के इशारे पर जनता के वोट हमारी पार्टी के लिये बरसते थे ।’

युवा कांग्रेसी मुस्कुराया, ’दादा, आप नाराज क्यों होते हैं । जीत का जश्न मनाने से पार्टी का टेम्पो हाई होता है ।‘

वयोवृद्ध कांग्रेसी ने गहरी सांस ली, ‘शायद तुम सही कह रहे हो । वही मसल है, रंग बंधा रहे, घर चुअत रहे ।‘

 

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