राजकीय इंटर कॉलेज के एक काउंटर पर अजीबोगरीब नजारा पेश आया । कन्या विद्याधन योजना के अन्तर्गत गरीबी रेखा के नीचे गुजर बसर कर रही कन्या लाभार्थियों की तादाद बहुत कम नजर आ रही है । गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लाभार्थियों ने तहसीलों में बाबुओं और अफसरों की जेब गरम कर जो आय प्रमाणपत्र हासिल किये थे, स्क्रूटनी में फर्जी साबित हुआ । सिर्फ सदर तहसील में 70 प्रतिशत आय प्रमाण पत्र गलत साबित हो गये ।
एक तथाकथित गरीब काउंटर पर वजीफे की उम्मीद लिए आया तो क्लर्क ने कहा, ‘तुमने आय प्रमाण पत्र फर्जी लगाया है । तुम्हे वजीफा नहीं मिल सकता ।’
अभिभावक चौंक पड़ा, ‘आप आय प्रमाण पत्र फर्जी कैसे बता सकते हैं । उसपर मुहर लगी है । जिम्मेदार अधिकारी के दस्तखत हैं ।’
क्लर्क मुस्कुराया, ‘मुहर और दस्तखत तो दिखायी पड़ रही है लेकिन तुमने इस सर्टिफिकेट को हासिल करने के लिये जो रिश्वत दी वह नजर नहीं आ रही है । बताओ कितने पैसे दिये हैं।’
अभिभावक का चेहरा उतर गया, ‘बताने से क्या फायदा । अगर आप वजीफा दिला सकते हैं तो मैं आपको भी धन दे सकता हूँ । अगर वजीफा नहीं मिला तो मैं यही समझूंगा कि रिश्वत की रकम चोरी हो गयी ।’
=> का बाबू ! सर्टिफिकेटवा तो सही लग रहा है, पर एम्मैं गाँधी जी क फोटुआ नज़र नहीं आये रही है……….लाल न सही इक ठो हरे वाले ही गाँधी जी चिपकाये दो. बाकी सब कर्रेक्ट है फर्मवा में………बुझाईल ……..?
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें